Neural Matching System: 10th Google Ranking Signal Explain

दोस्तों इस आर्टिकल में हम 10th Google Ranking Signal – Neural Matching System के बारे में बात करेंगे। हर बार की तरह हम आपको याद दिलाना चाहते हैं कि अगर आपने इस सीरीज के किसी भी आर्टिकल को Miss किया है तो आपको इस सीरीज का पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा।

Neural Matching System: 10th Google Ranking Signal Explain

इसलिए अगर आप अपनी वेबसाइट को गूगल में टॉप रैंकिंग दिलाना चाहते हैं तो आप गूगल द्वारा बताए गए इन 19 Ranking Signals को ध्यान से पढ़ें और अपनी वेबसाइट पर Implement करें।

आइए अब इस 10th Ranking Signal – Neural Matching System के बारे में डिटेल से जानते हैं और देखते हैं कि हम अपनी वेबसाइट को इस रैंकिंग सिग्नल के लिए कैसे ऑप्टिमाइज कर सकते हैं ?

Neural Matching System क्या है?

Neural Matching System एक यूनिक रैंकिंग सिग्नल है और ये Neural Networks पर आधारित है इसलिए इसे Neural Matching System कहा जाता है। इसके अलावा neural networks AI (Artificial Intelligence) के अंदर यूज किए जाते हैं इसीलिए यह एक AI based रैंकिंग सिग्नल है, जो मुख्य रूप से तीन काम करता है –

  1. यूजर सर्च बॉक्स में जो भी Question सर्च करता है  neural matching system उस Question का कांसेप्ट समझता है।
  2. Question सर्च करने के बाद जो भी पेजेस सर्च रिजल्ट में आ सकते हैं उन Pages के कांसेप्ट को समझने का काम भी neural matching system द्वारा ही किया जाता है।
  3. इसके बाद पूछे गए Question  और इन Pages के कांसेप्ट को आपस में मैच करना और फिर इसे मैचिंग के आधार पर पेजेस को सर्च रिजल्ट मैं रैंक करना।

ये सिस्टम Questions और Answers को आपस में मैच करता है और इस मैचिंग के लिए ये neural networks को यूज करता है इसलिए इसे neural matching system का नाम दिया गया है।

Neural Matching System कैसे काम करता है?

Neural matching system को गूगल ने 2018 में Introduce किया था और गूगल का Vision है कि ये Neural Matching System गूगल के अगले 20 सालों को गाइड करेगा क्योंकि ये AI Based हैं, फास्ट है और गूगल को ये Tough Queries को समझने में मदद करता है। अगर आप ध्यान देंगे तो आप पाएंगे कि मैंने अभी तक keyword शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है बल्कि मैंने Question और Concept शब्द को यूज किया है ।

इसका कारण यह है कि neural matching system keywords की तरफ फोकस करता ही नहीं है। क्योंकि Keyword एक डायरेक्ट चीज होती है जैसे Hair का अर्थ होता है बाल और Care का अर्थ होता है ख्याल। अब आप गूगल पर सिर्फ Hair या Care को सर्च नहीं करते हैं। हर कोई थोड़ी सी मेहनत में ज्यादा पाने की आश रखता है, इसलिए हम गूगल पर सर्च करते हैं – how to take care of Hair?

 अब ये एक पूरी Query या Question है जिसमे Hair एक कीवर्ड है और how to take care of Hair एक पूरी Query है। अब इस क्वेरी के कई अलग-अलग मीनिंग हो सकते हैं जैसे –

  • अगर ये quarry कोई फीमेल यूजर सर्च कर रहा है तो इसका मीनिंग अलग होगा और अगर ये Query किसी मेल यूजर से आ रही है तो इसका मीनिंग अलग होगा।
  • अगर कोई ऐसा Person इस Query को सर्च कर रहा है जिसके बाल झड़ रहे हैं तो उस परिस्थिति में Query का मीनिंग अलग होगा।
  • और अगर कोई ऐसा मेल इस Query को सर्च कर रहा है जिसने अभी अभी अपने हेयर ट्रांसप्लांट करवाए थे तो उस Situation में इसका Answer अलग होगा।

इन Examples से आप समझ पा रहे होंगे कि हर Situation में इस Hair कीवर्ड का मीनिंग नहीं बदल रहा है लेकिन इस पूरी क्वेरी का मीनिंग हर बार बदल रहा है।

Neural matching system इस Query के कांसेप्ट को समझने का काम भी करता है और इस Query के लिए जो Pages सर्च रिजल्ट्स में आ सकते हैं, उन Pages के कांसेप्ट को समझने का काम भी करता है और इसके बाद इन दोनों को आपस में मैच करके यह देखता है किन Pages का कांसेप्ट query के कांसेप्ट से सबसे ज्यादा मैच हो रहा है और फिर उन Pages को ये सर्च रिजल्ट में रैंक करता है।

यह सारा काम आपके सर्च बॉक्स में कुछ भी टाइप करने और आपके सामने सर्च रिजल्ट्स आने के बीच में ही हो जाता है यानी कि यह सारा काम कुछ Milliseconds में ही हो जाता है।

NOTE: हमेशा ध्यान रखें कि वेबसाइट्स की रैंक, हर बार सर्च करने पर सर्च रिजल्ट्स दिखाई देते टाइम ही होती है। गूगल के पास पहले से Pages को रैंक करके रखने का कोई सिस्टम नहीं है अर्थात जब भी कोई गूगल में सर्च करता है तभी वेबसाइट की रैंक Decide की जाती है।

Some Important Points about Neural Matching System

Neural Matching System के साथ गूगल Word Embedding को भी यूज करता है ताकि किसी टेक्स्ट में जो वर्ड्स यूज़ किए जा रहे हैं उनके मीनिंग को ये अच्छे से समझ सके जैसे Semantic frame.

लोगों के जो काम के वर्ड्स होते हैं वे उनकी Daily Conversation में कहीं ना कहीं यूज हो ही जाते हैं। जैसे एक कारपेंटर अपने खाने पीने की चीजों में भी कहीं ना कहीं लकड़ी को यूज कर ही देते हैं। आप सर्च इंजंस के लिए यह एक चुनौती है।

अब अगर एक कारपेंटर अपनी बीमारी को एक्सप्लेन करने में कहीं ना कहीं लकड़ी को यूज कर देता है तो वहां पर उस लकड़ी का मतलब लकड़ी नहीं है बल्कि वह अपनी बीमारी को एक्सप्लेन कर रहा है। Semantic framing मेकैनिज्म इस तरह के टेक्स्ट का असली Meaning समझने में मदद करता है।

इसलिए Neural Matching एक सिस्टम है जो सर्च यूज़र की Query और वेबसाइट ऑनर के बीच के गैप को Fill करने का काम करता है। यूजर को जो इंफॉर्मेशन Really में चाहिए वहां तक है उसे जाने में हेल्प करता है क्योंकि कई बार यूजर को पता नहीं होता है कि उसे अपने Question को एक्सप्लेन करने के लिए किस वर्ड का इस्तेमाल करना है, लेकिन गूगल का काम है उस Answer को देना।

How to Optimize Your Website for Neural Matching System

जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि इस Ranking Signal  का काम सर्च यूजर Query का Exact Answer  देना है इसलिए यह रैंकिंग सिग्नल उन्हीं पेजेस को सर्च रिजल्ट में रैंक करता है जो सर्च यूजर की Query को सबसे बेहतर ढंग से एक्सप्लेन करते हैं। इसलिए अगर आप भी अपनी वेबसाइट को Neural Matching System के लिए ऑप्टिमाइज करना चाहते हो तो जिस भी टॉपिक पर आप अपना आर्टिकल लिखना चाहते हो उस टॉपिक को अपने आर्टिकल में इस तरह से स्पष्ट करें कि यूजर को आपका आर्टिकल पढ़ने के बाद उस टॉपिक से रिलेटेड इंफॉर्मेशन लेने के लिए दूसरी वेबसाइट पर न जाना पड़े।

आप अपने आर्टिकल को एक Human Visitor के लिए पूरी तरह से ऑप्टिमाइज करें । क्योंकि जब आपके आर्टिकल में किसी Topic को अच्छे से एक्सप्लेन किया होगा और जब कोई इससे रिलेटेड कीवर्ड्स गूगल पर सर्च करेगा तो यह रैंकिंग सिग्नल आपके आर्टिकल को टॉप पोजीशन पर जरूर Rank करेगा। अपने आर्टिकल को यूजर फ्रेंडली बनाने के लिए गूगल की Helpful Content Update  के बारे में जरूर पढ़ें इससे आपको बहुत फायदा मिलेगा।

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