Link Analysis systems & Page Rank Algorithm Explain | Part 7

दोस्तों इस आर्टिकल में हम  7th Google ranking Signal – Link Analysis systems और Page Rank Algorithm के बारे में जानेंगे. अगर आपको Google के सभी Ranking Signals के बारे में Detailed से जानना है तो हमने आपको Google द्वारा शेयर किये गए 19 Google Ranking Signal को अलग-अलग आर्टिकल्स में विवरण के साथ समझाया है, इसलिए अगर आप अपने SEO Campaign को स्ट्रोंग बनाना चाहते है तो आप इन सभी Ranking Signals को पढ़े.

Link Analysis systems & Page Rank Algorithm Explain | Part 7

आज हम Link Analysis systems और Page Rank Algorithm से रिलेटेड सवालों पर बात करेंगे और देखेंगे कि ये क्या है और इनके काम करने का तरीका क्या है.
Link Analysis systems और Page Rank Algorithm दोनों बड़े ही Interesting टॉपिक्स है. Page Rank के बार में सभी लोगो ने सुना होगा लेकिन Link Analysis System के बारे में शायद आपने ना सुना हो. लेकिन इसमें फैक्ट ये है कि Link Analysis System, Page Rank से भी पुराना है. Link Analysis System, सर्च इंजन से भी पुराना है.

History of Page rank Algorithm and Link Analysis Systems

जब इन्टरनेट की शुरुआत हुई थी तो उस समय सर्च engines नहीं होते थे बल्कि Directory Websites होती थी जैसे Dmoz. बहुत सारे पुराने SEOs Dmoz के बारे ने जानते भी होंगे. उस समय इतनी ज्यादा websites भी नहीं होती थी कि लोगो को सर्च इंजन की कमी महसूस हो.

लेकिन ये सब बहुत जल्दी बदलने वाला था. 1987 में Archie नाम का सबसे पहला सर्च इंजन लांच हुआ, जिसे दुनिया का सबसे पहला सर्च इंजन कहा जाता है लेकिन ऐसा था नहीं! क्यूंकि Archie, websites से सर्च नहीं करता था बल्कि FTP Server पर जो फाइल्स पड़ी होती थी, उनमे से सर्च करता था.

इसके बाद September 1993 में Jughead नाम का सर्च इंजन आया लेकिन वास्तव में ये भी एक प्रॉपर सर्च इंजन नहीं था क्यूंकि यर Online Documents की सूचि में से सर्च करता था, इसलिए ये भी एक तरह की Directory Website थी. 

इसके तुरंत बाद 1993 में Aliweb नाम का एक सर्च इंजन लांच हुआ. ये एक प्रॉपर सर्च इंजन था जो websites को Keywords और Description के आदर पर सर्च रिजल्ट्स में दिखाता था. इसके अलाव Aliweb अपने Webmasters को Websites, Keywords और Description को सबमिट करने की सुविधा भी देते था.

ये जितने भी पहले के ज़माने के सर्च engines थे, जो मैंने आपको बताये है ये सभी ranking के लिए TF-IDF को use करते थे. Title Tag और H1, H2 में जो कीवर्ड्स होते थे उन्हें इस्तेमाल करते थे. लेकिन इन सभी को एक ही प्रॉब्लम थी कि इन सभी Ranking Signal के साथ छेड़-छाड करना बड़ा आसान था. क्यूंकि लोग अपने Article, Title और Headings में Keywords को Stuff कर देते थे, Invisible text को use किया जाता था और ये सर्च इंजन इन सभी घटिया पेजेज को रैंक भी करते थे क्यूंकि इन सर्च engines के पास Pages की Importance को चेक करने का कोई भी solid तरीका नहीं था.

Link Analysis System

पहले के जमाने के सर्च इंजिन्स की पेज की इम्पोर्टेंस  को समझने की समस्या को Link Analysis System ने ही दूर किया था. Google से भी पहले 1996 में Robin Li  Yanhong ने एक Randex नाम की एक अल्गोरिथम बनाई जो एक पेज की रैंक इस आधार पर निर्धारित करती थी कि उस पेज को कितने पेजेज Link कर रहे है. ये Randex Algorithm दुनिया की ऐसी पहली अल्गोरिथम थी जिसने websites को लिनक्स को Analysis करके उन्हें रैंक करना शुरू किया. इसे ही Link Analysis System का नाम दिया गया था.

Link Analysis system ranking signal

Page Rank Algorithm

Randex Algorithm के बाद गूगल के Co-Founder Larry Page ने अपनी एक Page Rank अल्गोरिथम बनाई, जो इस Links Analysis System को और भी आगे ले गया. Page Rank लिनक्स को Analysis करता है. Page Rank Algorithm ये निर्धारित करती है कि किसी एक पेज से कितना रैंकिंग स्कोर या Page Rank स्कोर किसी दुसरे पेज को जायेगा.

Larry Page ने ये क्लेम किया कि सिर्फ लिनक्स के नंबर या लिनक्स की Quantity के आधार पर websites को रैंक करना सही नहीं है क्यूंकि इन लिनक्स के साथ भी बाकि के signals की तरह छेड़-छाड़ की जा सकती है और और कोई कितनी भी लिनक्स बना सकता है.

Larry Page की Page Rank algorithm का आईडिया था कि वे किसी पेज को मिलने वाली लिनक्स केसाथ-साथ उन लिनक्स को मिलने वाली लिनक्स को भी मेजर करेंगे और और पुरे इन्टरनेट पर किसी भी पेज को मिलने वाली लिनक्स के आधार पर उनकी रैंक को decide करेंगे और फिर वो जिन पेजेज को लिंक दे रहे है उनकी रैंक decide हो सकती है, जिससे अंत में जब किसी एक पेज की रैंक decide हो तो वो सिर्फ लिनक्स की Quantity नहीं बल्कि उनकी quality के आधार पर हो.

Page Rank Algorithm की इंस्पिरेशन Randex अल्गोरिथम थी लेकिन Page Rank अल्गोरिथम Randex अल्गोरिथम से बेटर थी. यही कारण है कि Page Rank अल्गोरिथम पर बना Google दुनिया का सबसे पावरफुल सर्च इंजन बना गया. लेकिन ऐसा नहीं है कि Page Rank वो पहली algorithm थी जिसने Links Analysis करना शुरू किया था क्यूंकि Page Rank Algorithm से पहले एक और अल्गोरिथम बनी थी जो Links को Analysis करती थी और ये अल्गोरिथम आज भी मौजूद है.

लेकिन Robin Li Yanhong की Randex अल्गोरिथम खत्म नहीं हुई है. ये आदमी चाइना का रहने वाला था और इन्होने चाइना में Baidu नाम का सर्च इंजन बना दिया और Baidu को आज भी use किया जाता है.

अब Baidu, गूगल से पहले बन गया था और Link Analysis का कांसेप्ट दुनिया में Baidu सर्च इंजन ही लाया था लेकिन गूगल ने इस कांसेप्ट को ज्यादा अच्छे तरीके से Implement किया इसलिए गूगल आज इतना ज्यादा पोपुलर है.

अब Page Rank Algorithm और Link Analysis के बारे में काफी ज्यादा इतिहास हो गया है, आईये अब इससे रिलेटेड मौजूदा कॉन्सेप्ट्स को देखते है.

 जैसा कि हमने आपको बताया है कि Page Rank अल्गोरिथम Link Analysis System से पूर्णत: अलग है इसलिए गूगल अपनी इस अल्गोरिथम को और ज्यादा Improve करने के लिए एक और Model का use करता है, जिसे Random Surfer Model कहते है. अब ये Random Surfer Model क्या है और कैसे काम करता है, आईये जानते है –

Random Surfer Model क्या है और ये कैसे काम करता है?

पहले जब गूगल Page Rank Algorithm के जरिये किसी पेज को ranking score या Page Rank Score देता था तो उसके लिए गूगल को उस पेज की सभी Outbound Links और Inbound Links का भी विश्लेष्ण करके उन्हें एक Page Rank Score देना पड़ता था तभी वो उस पेज का Page rank Score तय कर पाता था. लेकिन इस प्रोसेस में गूगल को किसी एक पेज की रैंक decide करने के लिए काफी सारे अन्य पेजेज की रैंक को पहले decide करना पड़ता था जो एक Time Consuming प्रोसेस है और इसी समस्या को दूर करने के लिए गूगल ने एक नया मॉडल इजाद किया जिसे Random surfer Model कहते है.

Random Surfer Model

Random surfer Model आपस में मिलती-जुलती Niche की websites के गुच्छे के एक-एक पेज को Randomly विजिट करता है और उसके बाद उस पेज की सभी Outbound लिनक्स में से किसी एक पेज को Randomly सेलेक्ट करके उसे विजिट करता है और फिर उसके बाद उस पेज ने जितने दुसरे पेजेज को लिंक किया हुआ है उनको Randomly विजिट करता है. ये प्रोसेस ऐसे ही चलता रहता है और जितनी बार Random Surfer Model एक पेज को विजिट करता है उतनी बार एक पेज को एक ranking score देता है.

इसलिए जिस पेज को जितने ज्यादा पेजेज लिंक कर रहे होंगे उस पेज पर बार-बार Random Surfer Model के आने के Chances ज्यादा होंगे और जितनी बार ये एक पेज को विजिट करता है हर बार उस पेज का ranking score बढता है.

इसलिए अगर आप Random Surfer Model के जरिये अपने Ranking Score को बढ़ाना चाहते है तो आप अपनी Niche से Relevant ऐसी websites से लिंक ले जो आपस में Connected हो क्यूंकि इससे Random Surfer Model Bot आपके पेज पर ज्यादा बार आएगा जिससे आपका ranking score बढेगा और ranking score बढ़ने से आपके पेज की रैंक गूगल में बूस्ट होगी.

लेकिन इस मॉडल में भी एक प्रॉब्लम है, वो ये है कि ये Random Surfer Model websites के एक ही Cluster(गुच्छे) के अंदर घूमता रहता है. जैसे मान लो एक ही टॉपिक पर कुछ ऐसी websites है जो सब links के माध्यम से आपस में Connected है यानि उनका एक समूह या गुच्छा बना हुआ है और इसके आलावा उसी टॉपिक पर कुछ ऐसी websites का समूह भी है जिनका उस पहले वाले गुच्छे से कोई भी कनेक्शन नहीं है यानि इस समूह में मौजूद किसी भी website ने उस पहले वाले समूह में मौजूद किसी भी वेबसाइट को लिंक नहीं दिया हुआ है या उन्होंने इनको कोई लिंक नहीं दिया हुआ है.

अब अगर इन दोनों समूह में मौजूद सभी websites को गूगल इस Random Surfer Model के आधार पर रैंक देता है तो वो गलत होगी क्यूंकि इन दोनों Groups के आपस के Relevance (सम्बन्ध)  को Calculate नहीं किया जा सकता है जिससे इन्हें कोई proper ranking score नहीं दिया जा सकता है. इसीलिए गूगल यहाँ पर एक नये कांसेप्ट को अपनाता है, जिसे हम Damping Factor कहते है.

Damping Factor

Damping Factor एक Percentage value है, जो Random Surfer Model को एक websites के ग्रुप से दुसरे websites के ग्रुप पर बिना किसी Links के जाने की अनुमति देती है जिससे गूगल का ये Random Surfer Model किसी एक वेबसाइट के Cluster (गुच्छे) में सिमित होकर नहीं रह जाता है. ये Damping factor अपनी Damping Value के जरिये गूगल की Page Rank Algorithm को allow करता है कि वो किसी एक ग्रुप में लिमिट होकर ना रहे बल्कि वो उस ग्रुप से आगे जाकर बाकि websites को भी Explore करे.

आप यहाँ पर देख सकते है कि गूगल की इस Page Rank Algorithm में दो फैक्टर सबसे ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है –

  1. Random Surfer Model
  2. Damping Factor

समय के साथ गूगल ने Page Rank के आलावा और भी बहुत सारे फैक्टर्स को अपने Ranking Signals में शामिल किया लेकिन Page Rank Algorithm वो Core algorithm है जिसके आधार पर गूगल websites को रैंक करता था और अभी भी रैंक करता है, इसीलिए SEO में Quality Backlinks की इम्पोर्टेंस अभी भी बरकरार है. जितनी बार एक पेज जितने ज्यादा पेजेज के साथ लिंक किया जाता है, उतनी ही बार Random Surfer model उस पेज पर विजिट करता है और उस पेज की रैंक बढ़ने के Chances बढ़ जाते है.

अब सवाल आता है कि आप इस पुरे प्रोसेस को अपनी वेबसाइट के लिए कैसे use कर सकते है या इस्तेमाल कर सकते है.

How to Optimize Website for Page Rank Algorithm and Link Analysis System?

अगर हम उपर बताये गए विवरण का सार निकले तो वो ये है कि किसी पेज को मिलने वाली Backlinks का नंबर तो इम्पोर्टेन्ट है ही और उसके साथ ये भी इम्पोर्टेन्ट है कि उस पेज कितनी ज्यादा Connected Websites से Backlinks मिल रही है. अगर आपके पेज को Important Pages से लिनक्स मिल रही है तो उसके रैंक करने के चांस बढ़ जाते है.

लेकिन जब आप बहुत सारी ऐसी websites से लिनक्स लेते है जो आपकी Niche से रिलेटेड नहीं है या आप Randomly किसी भी वेबसाइट से लिंक ले लेते है तो उस केस में Random Surfer Model के आपके पेज पर विजिट करने के Chances बहुत कम होते है, जिससे आपकी website की rank कभी Improve नहीं होगी.

Last Words:

दोस्तों ये था 7th Google Ranking Signal जिसमे हमने Link Analysis system और Page rank Algorithm के बारे में विस्तार से जाना. इस रैंकिंग सिग्नल के लिए अगर आप अपनी वेबसाइट को ऑप्टिमाइज़ करना चाहते है तो हमेशा ऐसी websites से लिंक लीजिये जो आपस में Highly Connected है और जहाँ पर आपकी वेबसाइट से मिलता-जुलता कंटेंट पोस्ट किया जाता है.

अगर आपका हमारी Niche से रिलेटेड कोई सवाल है तो हमे जरुर बताये.

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