Crisis Information Systems (CIS) | 2nd Google Ranking Signal

ये Google Ranking Signal का 2nd पार्ट है जिसमे हम CIS यानि Crisis Information Systems के बारे में Detail से जानने वाले है. दोस्तों जैसा कि आपको पता है कि हम Google द्वारा share किये गए 19 Ranking Signals को एक-एक करके explain कर रहे है, जिनके बारे में आपके लिए जानना अति-आवश्यक है.  

अगर आपको गूगल सर्च रिजल्ट में सीधा यही आर्टिकल देखने को मिला है है या आप किसी भी मेथड से सीधे इसी Ranking Signal –  Crisis Information Systems तक पहुंचे है तो हमारा सुझाव है कि आप इस Series के सभी 19 Google Ranking Signals के बारे में जरुर पढ़े क्यूंकि एक बेहतर SEO बनने के लिए और अपनी वेबसाइट को Top Ranking दिलवाने के लिए इन सभी Ranking signal के बारे में जानना बहुत जरुरी है.

Crisis Information Systems (CIS) | 2nd Google Ranking Signal

इस Series के कुल मिलाकर 19 आर्टिकल्स है जिनमे हर एक आर्टिकल में हमने सिर्फ एक Ranking Signal को Explain किया है जिससे आपके लिए उसे समझना और अप्लाई करना आसान हो. इस पूरी  Series को आप 19 Google Ranking signals पर जाकर Access कर सकते है.

इस आर्टिकल में हम CIS को 5 पार्ट्स में discuss करेंगे जो निम्नलिखित है –

  1. CIS (Crisis Information Systems) क्या है?
  2. CIS के दो पार्ट्स कौन से है?
  3. CIS के दोनों पार्ट्स कैसे काम करते है?
  4. CIS का SEO पर क्या असर पड़ता है?
  5. CIS Ranking Signals के लिए आपको अपनी वेबसाइट में क्या-क्या Changes करने की आवश्यकता है?

What is CIS (Crisis Information Systems)?

CIS यानि Crisis Information Systems गूगल के कई सारे systems का एक ग्रुप है, जो किसी मुसीबत के टाइम पर सर्च करने वाले को Specific इनफार्मेशन दिखाता है, अब ये इनफार्मेशन चाहे वो किसी भी पेज से दे.

मान लीजिये एक वेबसाइट है जो किसी एक छोटे से शहर की News पब्लिश करती है और बहुत ज्यादा लोग इसे नहीं पढ़ते है, बहुत ज्यादा लोग इस न्यूज़ तक नहीं पहुँच पाते है जिसके परिणामश्वरूप वो वेबसाइट सर्च रिजल्ट में टॉप पर दिखाई नहीं देती है क्यूंकि इस वेबसाइट को ट्रैफिक कम मिल रहा है.

अब ऐसा हमेशा वास्तव में होता भी है कि जिस वेबसाइट पर ट्रैफिक कम होता है उसकी Rank पोजीशन भी कम ही होती है. लेकिन एक दिन इस छोटे से शहर में एक भूकंप आता है, तो अब इस भूकंप के बाद जब लोग इस छोटे से शहर के बारे में गूगल पर सर्च करेंगे या उस भूकंप क्र बारे में सर्च करेंगे तो गूगल के systems सर्च रिजल्ट्स में इस छोटी सी वेबसाइट की रैंकिंग को बढ़ा देंगे.

तो इस संकट के टाइम पर उस शहर के बारे में सबसे ज्यादा इनफार्मेशन ओर सबसे ज्यादा Accurate इनफार्मेशन वो छोटी से वेबसाइट देगी क्यूंकि ये इनफार्मेशन उस छोटी सी वेबसाइट के पास होगी ना कि किसी बड़ी वेबसाइट के पास होगी!

यहाँ पर एक बात और नोटिस करने लायक ही कि CIS एक Trigger Base रैंकिंग सिग्नल है यानी ये रैंकिंग सिग्नल Permanent नहीं है. जब ऐसा कुछ होगा जिससे ये Ranking Signal Trigger होता है, तभी कुछ websites के उपर इसका असर होगा और जैसे ही ये Trigger हट जायेगा, ये Ranking Signals वापिस नार्मल हो जायेंगे और सर्च results भी पहले जैसे नार्मल हो जायेंगे. अब ये Trigger क्या होते है, ये आपको आगे अपने आप समझ में आ जायेंगे.

What Are The 2 Pats Of CIS?

अब इस CIS (Crisis Information systems के दो पार्ट्स होते है-

  • Personal Crisis
  • SOS Crisis

How Does CIS Both Part Works?

आईये अब जानते है कि ये दोनों पार्टस के काम करने का क्या तरीका है और ये सर्च रिजल्ट में कब और किसे दिखाई देते है –

Personal Crisis

Personal Crisis Systems तब Trigger होता है, जब कोई Suicide, Se*ual Assault, Domestic Violence और Drugs कैसे Keywords की बारे मे सर्च करता है.  इस टाइप की जो Searches होती है, इनमे गूगल नार्मल सर्च रिजल्ट से हटकर यूजर को अलग रिजल्ट्स दिखाता है.

find personal crisis information with google search

गूगल सर्च रिजल्ट में Helpful Phone Numbers या फिर Contact Details दिखाने लगता है जिनसे कांटेक्ट करने सर्च करने वाले फ्री में सलाह ले सकते है. इस Helpful Information के लिए गूगल अलग-अलग Countries या Areas में अलग-अलग Government Organization या NGOs के साथ में पार्टनरशिप करता है ताकि users को हेल्प मिल सके.

इस वक्त गूगल, 35 Countries में Suicide के लिए इस तरह की हेल्पफुल डिटेल्स को दिखाता है और Domestic base violence या Gender base violence के लिए 9 Countries में फ़ोन नंबर या हेल्पफुल इनफार्मेशन गूगल user को दिखाता है और इंडिया इन दोनों ही लिस्ट में शामिल है.

SOS Crisis

SOS Alerts, प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप और Wildfires के केस में भी आते है और जो दुसरे मानव रचित आपदा (Man Made Disaster) होते है, उनके चलते भी ये SOS Crisis Systems ट्रिगर हो सकते है.

किसी एरिया में इन्टरनेट कनेक्टिविटी कैसी है, Government Resources क्या इनफार्मेशन दे रहे है, Non-Government लेकिन Authoritative Resources क्या इनफार्मेशन दे रहे है, ज़मीं पर हालात कैसे है, इन सभी हिंट्स के आधार पर ही पर  SOS Alert Systems ट्रिगर होता है और गूगल सर्च रिजल्ट में useful information को दिखाने लगता है.

ये इनफार्मेशन लोकल लैंग्वेज और इंग्लिश लैंग्वेज दोनों में दिखाई जाएगी. गूगल SOS Alerts को ज्यादातर उभी users को दिखाया जायेगा जो किसी विशेष आपदा या खजाने के बारे में सर्च कर रहे है.

Friends अभी तक आप समझ होंगे कि Crisis Information Systems या Crisis Information Ranking Factors क्या है, इसके दो पार्ट्स कौन-कौन से है और ये कब, किन लोगो को दिखाई देता है. जब कोई Personal Crisis या Natural/ Unnatural Disaster के बारे में गूगल पर सर्च करता है, तो ही गूगल सर्च रिजल्ट पर ये इनफार्मेशन दिखाता है.

How Does CIS Affect SEO?

अब हम बात करते है कि CIS का SEO पर क्या प्रभाव पड़ता है-

Personal Crisis Personal Crisis के केस में इस Ranking Signal का अधिकतर websites पर कोई भी असर नहीं पड़ेगा. अगर आपकी वेबसाइट Mental Health, Mental Awareness और Physical Abuse से रिलेटेड टॉपिक्स पर कंटेंट पब्लिश करती है तो हो सकता है आपकी वेबसाइट कुछ searches के लिए पोजीशन 0 ना रैंक करे क्यूंकि गूगल वहां पर Personal Crisis से रिलेटेड हेल्फुल इनफार्मेशन को दिखायेगा.

SOS Alerts – प्राक्रतिक और अप्राकृतिक आपदाओ के लिए छोटी या नई websites को Temporarily ट्रैफिक का नुकसान देखने को मिल सकता है क्यूंकि उस वक्त Government sources या Well Known sources या Well Establish News Websites को गूगल अहमियत देगा और उन्हें सर्च results में दिखायेगा लेकिन अगर आपकी वेबसाइट उसी विशेष एरिया से रिलेटेड है और वही की इनफार्मेशन दे रही है तो ऐसे में गूगल आपकी वेबसाइट को भी ट्रैफिक दे सकता है.

What Changes Need To Be Done In The Website To Achieve CIS?

अब अंतिम सवाल आता है कि आप अपनी वेबसाइट को इस Google Ranking signal – Crisis Information Systems के लिए कैसे ऑप्टिमाइज़ कर सकते है –

Personal Crisis Systems – Domestic Crisis और Personal Crisis के केस में गूगल जिन organizations को दिखाता है उनके साथ गूगल पार्टनरशिप कर चूका है और आप अगर चाहते है कि गूगल आपकी वेबसाइट या आपकी हेल्पलाइन को सर्च results में दिखाए तो आपको गूगल के साथ इस बारे में पार्टनरशिप करनी होगी. एक Country में एक से ज्यादा Organization गूगल के साथ पार्टनरशिप कर सकते है.

SOS Alerts Systems – प्राक्रतिक और अप्राकृतिक आपदाओ के केस में गूगल नई websites को कम जगह देगा और गूगल ऑफिसियल और अथॉरिटी वाली साइट्स को SERP में ज्यादा अहमियत देगा लेकिन कुछ ही दिनों में, जैसे ही ये आपदा खत्म होती है या इसका असर कम होता है, तब ये स्थिति अपने आप नार्मल हो जाएगी. अगर आपकी वेबसाइट या न्यूज़ साईट नई है और आपके एरिया में ऐसी कोई आपदा है तो आप चिंता मत करिए, थोड़े ही दिनों में सर्च रिजल्ट अपने आप नार्मल अवस्था में आ जायेगा और आपका ट्रैफिक आपको दोबारा मिलने लगेगा.

Last Words:

ये था गूगल के 19 Ranking Signals का दूसरा Ranking signal जिसे Crisis Information Systems (CIS) के नाम से जाना जाता है और अगर आप अपनी वेबसाइट कि रैंकिंग को लेकर सीरियस है तो आप इन सभी Ranking Signals को ध्यान से पढ़िए और इन्हें फोलो करिए, आपको जरुर हेल्प मिलेगी.

अगर आपका इस Ranking Signal के बारे में कोई सवाल या सुझाव है तो उसे हमारे साथ शेयर जरुर करे. Your Feedback is useful for us.

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